" एस्ट्रोभूमि - द लक चेंजर" से जानेगे की क्या है तेजा दशमी का महत्व।

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी को तेजा दशमी मनाई जाती है। इस बार तेजादशमी 28 अगस्त 2020 शुक्रवार को आ रही है। " एस्ट्रोभूमि - द लक चेंजर" से जानेगे की क्या है तेजा दशमी का महत्व।



ये त्यौहार खासकर राजस्थान और मध्यप्रदेश में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सर्पदंश से बचने के लिए वीर तेजाजी की पूजा की जाती है। इसके पीछे एक कथा है तेजाजी बहुत ही साहसी व्यक्ति थे एक बार वो अपने साथी के साथ अपनी बहन को लेने उसके ससुराल गए। उस दिन शुक्ल पक्ष की दशमी थी। वहाँ पहुंचे तो उन्हें पता लगा कि कोई डाकू अपने साथी के साथ उनकी बहन के ससुराल से सारी गाय लूटकर ले गया तो तेजाजी अपने साथियों के साथ जंगल की ओर निकल गए उन गायों को छुड़ाने के लिए। रास्ते मे जाते वक्त उन्हें एक साँप मिलता है और वो उन्हें डसने की कोशिश करता है तब तेजाजी उस साँप को वचन देकर बोलते है कि अभी में अपनी बहन की गायों को बचाने जा रहा हु जब में उन्हें लेकर वापस आ जाऊँगा तब तुम मुझे डंस लेना ये सुनकर साँप ने रास्ता छोड़ दिया।


फिर तेजाजी अपनी बहन की गायों छुड़वा लेते है। डाकुओं के साथ हुए संघर्ष की वजह से वे लहूलुहान हो जाते है और ऐसे ही अपना वचन पूरा करने साँप के पास पहुँचते है। साँप तेजाजी को ऐसी अवस्था मे देखकर कहता है कि तुम्हारा पूरा शरीर खून से अपवित्र हो चुका है अब मै तुम्हे कहा डंसु तब तेजाजी उसे अपनी जीभ पर कांटने को कहते है। उनकी वचनवद्धता को देखकर नागदेव उन्हें आशीर्वाद देते है कि जो व्यक्ति सर्पदंश से पीड़ित है और वह तुम्हारे नाम का धागा बंधता है तो उस पर जहर का असर नही होगा ऐसा कहकर नागदेवता उनकी जीभ पर डंस देते है। इसके बाद से हर शुक पक्ष की दशमी को तेजाजी की पूजा की जाती है।

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