"एस्ट्रोभूमि-द लक चेंजर" से जानेंगे की क्या है पितृपक्ष में कौए का महत्व।


श्राद्ध में कौए का बड़ा ही महत्व है। पितृपक्ष में श्राद्ध का एक भाग कौए को भी दिया गया है इसका कारण यह है कि पुराणो में कौए को देवपुत्र माना है। इन्द्र के पुत्र जयन्त ने ही सबसे पहले कौए का रूप धारण किया था। यह कथा त्रेतायुग की है, जब भगवान श्रीराम ने अवतार लिया और जयंत ने कौए का रूप धारण कर माता सीता के पैर में चोंच मारा था। तब भगवान श्रीराम ने तिनके का बाण चलाकर जयंत की आंख फोड़ दी थी। जब उसने अपने किए की माफी मांगी तब श्री राम ने उसे यह वरदान दिया कि तुम्हें अर्पित किया भोजन पितरों को मिलेगा। तभी से श्राद्ध में कौओं को भोजन कराने की परम्परा चली आ रही है। यही कारण है कि श्राद्ध में कौओं को भोजन कराया जाता है। श्राद्धपक्ष में यदि कौआ आपके हाथों से दिया भोजन ग्रहण कर ले तो ऐसा माना जाता है कि पितरो की कृपा आपके ऊपर है।

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