"एस्ट्रोभूमि-द लक चेंजर" से जानेंगे गणेश विसर्जन का महत्व।



गणेश विसर्जन का महत्व। भगवान गणेश की पूजा और सेवा के 10 दिन बाद इन्हें विसर्जित किया जाता है। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने भगवान गणेश को चतुर्थी के दिन महाभारत की कथा सुनानी शुरू की थी। लगातार 10 दिन तक वेदव्यास कथा सुनाते रहे और भगवान गणेश कथा को लिखते रहे जब कथा पूरी हुई और वेदव्यासजी ने आंखे खोली तो देखा कि लगातार 10 दिन की कड़ी मेहनत की वजह से गणेशजी का तापमान बढ़ गया। उनका तापमान कम करने के लिए वेदव्यास जी उन्हें पास के सरोवर ले गए और उन्हें डुबकी लगवाई उस दिन अनंत चतुर्दशी थी तब से गणेश विसर्जन की परंपरा शुरू हो गई।


ऐसे करे बप्पा की विदा :- विसर्जन करने से पहले भगवान को भोग लगाएं और उनकी आरती करें। अब एक लकड़ी का पटा ले उसपर कोई घर की महिला स्वस्तिक बनाएं और अक्षत चढ़ाए अब इसपर लाल या पीले रंग का वस्त्र बिछाकर अब गणेश जी को इस पर रखे इसके बाद भगवान को फूल और 5 मौदक चढ़ाए। अब भगवान को वुसर्जित करने से पहले भी एक और बार पूजा करे और 10 में हुई कोई भूल के लिए क्षमा मांगे और अपनी मनोकामना पूर्ण करने का अनुरोध करें। ध्यान रहे विसर्जन करते वक़्त कोई भी समान फेके न और न है पर्यावरण को हानि पहुचाए, सम्मान पूर्वक भगवान का विसर्जन करे।

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