कब है दुर्गा अष्टमी या महा अष्टमी? जानें शारदीय नवरात्रि में क्यों है यह महत्वपूर्ण


Durga Ashtami Date In Navratri 2022: शारदीय नवरात्रि का पहला दिन जैसे महत्वपूर्ण होता है, वैसे ही महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी और महा नवमी का दिन भी महत्वपूर्ण होता है. नवरात्रि के पहले दिन की तरह ही इन दो दिनों का भी इंतजार लोगों को बेसब्री से रहता है क्योंकि ये दोनों ही दिन पूजा पाठ की दृष्टि से विशेष होते हैं. तिरूपति के ज्योतिषाचार्य डाॅ. कृष्ण कुमार भार्गव के अनुसार, महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी का दिन माता महागौरी की पूजा का दिन होता है. इनकी आराधना करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है. आइए जानते हैं शारदीय नवरात्रि में महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी के महत्व के बारे में.


शारदीय नवरात्रि दुर्गा अष्टमी 2022 कब है?

इस साल शारदीय नवरात्रि की दुर्गा अष्टमी 03 अक्टूबर दिन सोमवार को है. नवरात्रि की अष्टमी तिथि का प्रारंभ 02 अक्टूबर को शाम 06 बजकर 47 मिनट से हो रहा है. यह 03 अक्टूबर को शाम 04 बजकर 37 मिनट तक मान्य है.

रवि और शोभन योग में दुर्गा अष्टमी दुर्गा अष्टमी के दिन रवि योग और शोभन योग बना है. ये दोनों ही योग मांगलिक कार्यों के लिए शुभ हैं. शोभन योग प्रातःकाल से लेकर दोपहर 02 बजकर 22 मिनट तक है. रवि योग देर रात 12 बजकर 25 मिनट से लेकर अगली सुबह 06 बजकर 15 मिनट तक है.


महा अष्टमी या दुर्गा अष्टमी का महत्व 1. जो लोग नवरात्रि में पूरे 09 दिनों तक व्रत नहीं रख पाते हैं, वे पहले दिन और अष्टमी का व्रत रखते हैं.

2. दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा के महागौरी स्वरूप की पूजा करते हैं. भगवान शिव के वरदान से माता पार्वती को पुनः गौर वर्ण प्राप्त हुआ था क्योंकि शिव जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप के कारण उनका रंग काला पड़ गया था.

3. दुर्गा अष्टमी के दिन कन्या पूजन कराने का विधान है. इस दिन 02 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्याओं का पूजन किया जाता है. हर उम्र की कन्या अलग अलग देवियों का रूप होती हैं. उनके अलग अलग आशीर्वाद प्राप्त होता है.


4. कन्या पूजन करने से मां दुर्गा का आशीष मिलता है क्योंकि ये कन्याएं मां दुर्गा का स्वरूप मानी जाती हैं. यह कन्या पूजन नवरात्रि या दुर्गा पूजा का महत्वपूर्ण भाग है.


5. कई स्थानों पर दुर्गा अष्टमी के दिन नवरात्रि का हवन भी करते हैं. वैसे तो आप नवरात्रि के प्रत्येक दिन हवन कर सकते हैं, लेकिन मुख्यतः अष्टमी, नवमी और दशमी पर हवन करने की परंपरा है.

6. हवन करने से पूजा को संपूर्णता प्राप्त होती है, उसमें सभी देवी और देवताओं के हवन का अंश डालते हैं ताकि वे प्रसन्न रहें.

7. दुर्गा अष्टमी या नवमी को किए गए हवन में नवग्रहों के लिए भी एक भाग डालते हैं, इससे ग्रह दोष शांत होते हैं.