ग्रह के अनुसार व्यवसाय और करें उपाय (remedies), पाएं लाभ



हर व्यक्ति अपने कॅरियर में सफल होना चाहता है, फिर चाहे वह जॉब में हो या बिजनेस, हालांकि, कई बार ऐसा हो नहीं पाता है. विभिन्न प्रकार की रुकावटें या नकारात्मक घटनाओं के कारण व्यक्ति को सफलता मिल नहीं पाती है। ग्रह हमारे कॅरियर पर भी बड़ा असर डालते हैं। हर तरह का बिजनेस किसी न किसी ग्रह से संबंधित होता है, यदि जातक की कुंडली (kundali) में उस ग्रह की स्थिति मजबूत हो तो उसे बड़ी कामयाबियां मिलती हैं, वरना उसे नुकसान का सामना करना पड़ता है। आज हम विभिन्न प्रकार के व्यवसाय और उनसे संबंधित ग्रहों के बारे में जानते हैं, साथ ही उन ग्रहों को मजबूत करने के उपाय भी जानेंगे, ताकि बिजनेस में कामयाबी पाई जा सके।


दशम भाव का विश्लेषण-

कुंडली (kundali) में व्यापार या नौकरी को दशम भाव से देखा जाता है। दशम भाव के स्वामी को दशमेश या कर्मेश या कार्येश कहते हैं। इस भाव से यह देखा जाता है कि व्यक्ति सरकारी नौकरी करेगा अथवा प्राइवेट जॉब से अपना कॅरियर बनाएगा या व्यापार करेगा तो कौन-सा और उसे किस क्षेत्र में अधिक सफलता मिलेगी? सप्तम भाव साझेदारी का होता है। इसमें मित्र ग्रह हो तो पार्टनरशिप से लाभ मिलता है। शत्रु ग्रह हो तो पार्टनरशिप से नुकसान होता है। मित्र ग्रह सूर्य, चंद्र, बुध, गुरु होते हैं। शनि, मंगल, राहु, केतु ये आपस में मित्र होते हैं। सूर्य, बुध, गुरु और शनि दशम भाव के कारक ग्रह हैं।

ऐसा भी कहा जाता है कि मन का स्वामी चंद्र जिस राशि में हो, उस राशि से स्वामी ग्रह की प्रकृति के आधार पर या चंद्र से उसके युति अथवा दृष्टि संबंध के आधार पर यदि कोई व्यक्ति अपनी आजीविका अथवा कार्य का चयन करता है। बलवान चंद्र से दशम भाव में गुरु हो तो ‘गजकेसरी’ नामक योग होता है किंतु गुरु, कर्क या धनु राशि का होना चाहिए। ऐसा जातक यशस्वी, परोपकारी धर्मात्मा, मेधावी, गुणवान और राजपूज्य होता है। यदि जन्म लग्न, सूर्य और दशम भाव बलवान हो तथा पाप प्रभाव में न हो तो जातक शाही कार्यों से धन कमाता है और यशस्वी होता है।

दशम भाव में केवल शुभ ग्रह हो तो ‘अमल कीर्ति’ नामक योग होता है किंतु उसके अशुभ भावेश न होने तथा अपनी नीच राशि में न होने की स्थिति में ही इस योग का फल मिलेगा। दशमेश के बली होने से जीविका की वृद्धि और निर्बल होने पर हानि होती है। लग्न से द्वितीय और एकादश भाव में बली एवं शुभ ग्रह हो तो जातक व्यापार से अधिक धन कमाता है। धनेश और लाभेश का परस्पर संबंध धनयोग का निर्माण करता है। दशम भाव का कारक यदि उसी भाव में स्थित हो अथवा दशम भाव को देख रहा हो तो जातक को आजीविका का कोई न कोई साधन अवश्य मिल जाता है।

दशम भाव व दशमेश का संबंध आपकी जीविका से होता है। द्वितीय, द्वतीयेश व एकादश भाव, एकादेश का भी कुण्डली में मजबूत होना आवश्यक होता है। क्योंकि द्वतीय व द्वतीयेश का संबंध धन से होता है एंव एकादेश व एकादश भाव का रिलेशन लाभ से होता है। व्यापार में धन व लाभ का विशेष महत्व है। धन नहीं होगा तो बिजनेस कर पाना मुश्किल है और धन अच्छे से नहीं आएगा तो बिजनेस करने से फायदा क्या?


दशम भाव में ग्रह की स्थिति होने पर व्यवसाय देंगे लाभ

* चन्द्र होने पर : जातक मातृ कुल का व्यवसाय या माता के धन से (आभूषण, मोती, खेती, वस्त्र आदि) व्यवसाय करता है। ये जातक प्राय: सरकारी नौकरी में अच्छे पद पर जाते हैं।


* मंगल होने पर : भाइयों के साथ पार्टनरशिप (बिजली के उपकरण, अस्त्र-शस्त्र, आतिशबाजी, वकालत, फौजदारी) में व्यवसाय लाभ देता है। ये व्यक्ति सेना, पुलिस में भी सफल होते हैं।


* बुध होने पर : मित्रों के साथ व्यवसाय लाभ देता है। लेखक, कवि, ज्योतिषी, पुरोहित, चित्रकला, भाषण कला संबंधी कार्य में लाभ होता है।


* बृहस्पति होने पर : भाई-बहनों के साथ व्यवसाय में लाभ, इतिहासकार, प्रोफेसर, धर्मोपदेशक, जज, व्याख्यानकर्ता आदि कार्यों में लाभ होता है।


* शुक्र होने पर : पत्नी से धन लाभ, व्यवसाय में सहयोग। जौहरी का कार्य, भोजन, होटल संबंधी कार्य, आभूषण, पुष्प विक्रय आदि कामों में लाभ होता है।


कमजोर एकादश होने से होता है ऐसा

यदि एकादश भाव व एकादेश बलवान नहीं है तो व्यापार में लाभ नहीं होगा। वैसे मूलत: व्यापार के लिए बुध व बृहस्पति ग्रह का शुभ होना अच्छा माना जाता है लेकिन व्यापार किस चीज से सम्बन्धित है। इसके लिए प्रत्येक ग्रह की अलग-अलग क्षेत्र में विशेष भूमिका है। 1- यदि आप राजनीति, चिकित्सा क्षेत्र, विद्युत विभाग, होटल मैनेजमेंट, रेलवे विभाग, आभूषण खरीदना-बेचना, रत्न बेचना, विद्युत उपकरण, मेडिकल स्टोर, जनरल स्टोर, कपड़े का कार्य, वाहनों का क्रय-विक्रय, पुस्तक भण्डार, अनाजों का खरीदना-बेचना आदि प्रकार के व्यवसाय करने के लिए जन्मपत्री में सूर्य ग्रह शुभ व बलवान आवश्यक है।


ग्रहों से संबंधित व्यापार

सूर्य ग्रह से संबंधित व्यापार: सरकारी नौकरी , सरकारी सेवा , उच्च स्तरीय प्रशासनिक सेवा , मजिस्ट्रेट , राजनीति , सोने का काम करने वाले , जौहरी , फाईनान्सर , प्रबन्धक , , राजदूत , चिकित्सक दवाइयों से संबंधी मैनेजमेंट , , उपदेशक , मंत्र कार्य , फल विक्रेता , वस्त्र , घास फूस से निर्मित सामाग्री , तांबा , स्वर्ण, माणिक , सींग या हड्डी के बने समान , खेती बाड़ी , धन विनियोग , बीमा एजेंट , सरकारी मुखबीर , गेहूं से संबंधी , विदेश सेवा , उड्डयन , ओषधि , चिकित्सा , सभी प्रकार के अनाज , लाल रंग के पदार्थ , शहद , लकड़ी व प्लाई वुड का कार्य , चतुर्थ से संबंध बनाकर इमारत बनाने मे काम आने वाला लकड़ी , सरार्फा , वानिकी , ऊन व ऊनी वस्त्र , पदार्थ विज्ञान , अन्तरिक्ष विज्ञान , फोटोग्राफी , नाटक , फिल्मों का निर्देशन , इत्यादि सूर्य के साथ पंचमेश या नवमेश का संबंध बनता हो तो जातक अपने पिता या पारीवारिक काम को आगे बढ़ सकता है। सूर्य को मजबूत करने के आसान उपाय 1) कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए गंगाजल और लाल चंदन को घिसकर नहाने के पानी में डालें। सूर्य मंत्रों का जाप करें। लेकिन ध्यान रखें की सूर्य भगवान की आराधना हमेशा प्रात:काल में की जाती है। इसलिए सुबह जल्दी उठकर पूजा करें। 2) रात में किसी तांबे के पात्र में जलभर उसे सिरहाने रखकर सो जाएं। सुबह उठकर उस जल को पीने से कुंडली में सूर्य मजबूत होता है। ये आपके स्वास्थ्य के लिए भी सही रहता है, इससे पाचन संबंधी समस्याएं भी दूर होती हैं। दाएं हाथ में तांबे का कड़ा भी धारण कर सकते हैं।

3) रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित किया गया है। अपने दोनों हाथों में गेहूं भरकर रविवार के दिन गाय को खिलाएं। लेकिन ध्यान रखें कि गेहूं को अपने हाथों से खिलाएं जमीन पर न रखें। हाथ में 7 बार घुमाकर मौली बांधे। 4) कुंडली में सूर्य को मजबूत करने के लिए तांबे के लोटे में जल, लाल चंदन, गुलाब का फूल, और रोली डालकर नियमित रूप से सूर्य को अर्घ्य देंं। इससे आपका सूर्य मजबूत होगा। चंद्रमा ग्रह से संबंधित व्यापार: व्यवसाय क्षेत्र में चंद्रमा एक जलीय ग्रह है अत: इसके कार्यों में जल से संबंधित वस्तुओं का व्यापार करने के अवसर देखे जा सकते हैं। जल से उपरत्न वस्तुएं, पेय पदार्थ, दूध, डेयरी प्रोडक्ट (दही, घी, मक्खन) खाद्य पदार्थ, आईसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक्स, मिनरल वाटर, आइसक्रीम, श्वेत पदार्थ, चांदी, चावल, नमक, चीनी, पुष्प-सज्जा, मोती, मूंगा, शंख, ( चीनी मिट्टी ), कोमल मिट्टी ( मुलतानी ), प्लास्टर आॅफ पेरिस, सब्जी, वस्त्र व्यवसाय, रेडीमेड वस्त्र, जादूगर, फोटोग्राफिक्स व वीडियो मिक्सिंग, विदेशी कार्य, आयुर्वेदिक दवाएं, आचार-चटनी-मुरब्बे, जल आपूर्ति विभाग, नहरी एवं सिंचाई विभाग, मत्स्य से संबंधित क्षेत्र, लांड्री, आयात -निर्यात, शीशा, चश्मा, महिला कल्याण , नेवी ( नौ सेना ), जल आपूर्ति विभाग, नहरी एवम सिंचाई विभाग, आबकारी विभाग, नाविक, यात्रा से संबंधित कार्य, अस्पताल, नर्सिंग, परिवहन, जनसंपर्क अधिकारी, कथा-कविता लेखन इत्यादि । चन्द्र + राहू = मादक पदार्थ, शराब । चन्द्र + शुक्र = सुगंधित तेल, इत्र । यदि आप बागवानी का कार्य, कृषि कार्य, तरल पदार्थों का व्यापार, आयुर्वेदिक दवाओं का व्यापार, बिजली की दुकान, मोटर पार्ट्स, पेट्रोल पम्प, कोल्ड्र डिंक, पानी, संगीत अकादमी, होटल, रेस्टोरेन्ट, मिट्टी का कार्य, ठेकेदारी, किसी भी क्षेत्र में दलाली, कैरोसिन तेल, प्रकाशन, दूध की डेरी आदि व्यवसाय करना चाहते है तो कुण्डली में चन्द्रमा का बलवान होना बहुत जरूरी है। चंद्रमा ग्रह को मजबूत करने के आसान उपाय चंद्रमा को स्त्री ग्रह माना गया है अत: जब यह अपने ही जैसे दूसरे ग्रह के साथ संबंध बनाता है तो जातक स्त्री पक्ष के साथ मिलकर काम करने वाला बन सकता है। 1) चंद्रमा को मजबूत करने के लिए जातक को मोती धारण करना चाहिए, प्रतिदिन माता के पैर छूना चाहिए, पानी या दूध को साफ पात्र में सिरहाने रखकर सोएं और सुबह कीकर के वृक्ष की जड़ में डाल दें। चावल, सफेद वस्त्र, शंख, वंशपात्र, सफेद चंदन, श्वेत पुष्प, चीनी, बैल, दही और मोती दान करना चाहिए। 2) बिना नमक के दही, दूध, चावल, चीनी और घी से बने खाद्य पदार्थ खाने से भी चंद्रमा मजबूत होता है। Ñ3) बिजनेस में लाभ और कार्यों में सफलता के लिए भी आप सोमवार का व्रत कर सकते हैं, इससे चंद्रमा मजबूत होगा और आपका कल्याण होगा। 4) सोमवार के दिन किसी ब्राह्मण या पात्र व्यक्ति को घी वाला कलश, दही, शंख, सफेद वस्त्र, मोती या चांदी का दान करने से भी चंद्रमा का दोष दूर होता है और ग्रह मजबूत होता है। 5) यदि आप प्रत्येक दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करते हैं, तो भी चंद्रमा मजबूत होगा क्योंकि भगवान शिव तो स्वयं चंद्रशेखर हैं। उन्होंने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है। मंगल ग्रह से संबंधित व्यापार ज्योतिष में मंगल को सेनापती के रूप में दर्शाया गया है। मंगल ग्रह अग्नि तत्व का ग्रह तथा भूमि का कारक माना गया है। इस ग्रह के संदर्भ में सेना संबंधी कार्यों और पुलिस विभाग से जुड़े कामों को देखा जा सकता है। पुलिस व सेना की नौकरी, अग्नि कार्य, बिजली का कार्य, विद्युत विभाग, साहसिक कार्य, धातु कार्य, जमीन का क्रय -विक्रय, भूमि के कार्य, भूमि विज्ञान, रक्षा विभाग, खनिज पदार्थ, इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर, मैकेनिक , वकालत, ब्लड बैंक, शल्य चिकित्सक, दवा विक्रेता, सिविल इंजीनियरिंग, शस्त्र निर्माण, बॉडी-बिल्डिंग, साहसिक खेल , कुश्ती, स्पोर्ट्स, खिलाड़ी, फायर ब्रिगेड, आतिशबाजी, रसायन शास्त्र, सर्कस, नौकरी दिलवाने के कार्य, शक्तिवर्धक कार्य, अग्नि बीमा, चूल्हा, ईंधन, पारा, पत्थर, मिट्टी का समान, तांबे से संबंधित कार्य, धातुओं से संबंधित कार्य क्षेत्र, लाल रंग के पदार्थ, बेकरी, कैटरिंग, हलवाई, रसोइया, ईटों का भट्ठा, बर्तनों का कार्य, होटल एवं रेस्तरां, फास्ट -फूड, जूआ, मिट्टी के बर्तन व खिलौने, नाई, औजार, भट्ठी, इत्यादि। अगर आप कम्यूटर के क्षेत्र में साफ्टवेयर, हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक, भूमि, मेडिकल, पेट्रोल पम्प, सर्जरी का सामान, कोर्ट-कचहरी, ठेकेदारी, मेडिकल की दुकान, धर्म उपदेशक, औषधि निर्माण कारखाना, आदि किसी प्रकार का बिजनेस करना चाहते है तो उसके लिए मंगल ग्रह का मजबूत होना जरूरी है और साथ में मंगल का दशम, दशमेश व लाभ भाव से संबंध होना आवश्यक है। मंगल ग्रह को मजबूत करने के आसान उपाय 1) ज्योतिषशास्त्र के अनुसार मंगल खराब हो तो हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। 2) मंगल ग्रह को मजबूत करने के लिए भाईयों और मित्रों पर क्रोध करने से बचना चाहिए। गाय को चारा खिलाना चाहिए, मीठी तंदूरी रोटी दान करें। बहते हुए पानी में रेवड़ी और बताशा डालें। 3) लाल वस्त्र में सौंफ बांधकर उसे अपने बेडरूम में रखने से मंगल ग्रह को मजबूती मिलती है। इसके अलावा गेहूं, तांबा, लाल कपड़ा, माचिस और गुड़ का दान करना चाहिए। मान्यता है ऐसा करने से मंगल शुभ प्रभाव देने लगता है। 4) सफलता के लिए इन जातकों को अपने आॅफिस में लाल रंग के हनुमान जी की स्थापना करना चाहिए और रोज सुबह इनके सामने चमेली के तेल का दीपक जलाना चाहिए। हनुमान चालिसा का पाठ करना और हर मंगलवार को मजदूरों को हलुआ-पूरी बांटना बहुत लाभ देगा। बुध ग्रह से संबंधित व्यापार बुध एक पूर्ण वैश्य रूप का ग्रह है। व्यापार से जुड़े होने वाला एक ग्रह है जो जातक को उसके कारक तत्वों से पुष्ट करने में सहायक बनता है। इसी के साथ व्यक्ति को अपनी बौद्धिक्ता का बोध भी हो पाता है और उसे सभी दृष्टियों से कार्यक्षेत्र में व्यापार करने वाला बनाता है। व्यापार कार्य, वेदों का अध्ययन, लेखन कार्य (लेखक), ज्योतिष कार्य, प्रकाशन कार्य, चार्टड अकाउंटेंट, मुनीम, शिक्षक , गणितज्ञ, कंसलटैंसी, वकील, ब्याज, बट्टा, पूंजी निवेश, शेयर मार्केट, कम्प्यूटर जॉब, लेखन, वाणीप्रधान कार्य, एंकरिंग, शिल्पकला, काव्य रचना, पुरोहित का कार्य, कथा वाचक, गायन विद्या, वैद्य, गणित व कॉमर्स के अध्यापक, वनस्पति, बीजों व पौधों का कार्य, समाचार पत्र, दलाली के कार्य, वाणिज्य संबंधी, टेलीफोन विभाग, डाक, कोरियर, यातायात, पत्रकारिता, मीडिया, बीमा कंपनी, दलाली, आढ़त, हरे पदार्थ, सब्जियां, लेखा कार्य, कम्प्यूटर, फोटोस्टेट, मुद्रण, डाक-तार, दूत कर्म, टाइपिस्ट, बीमा, सैल टैक्स, आयकर विभाग, सेल्स मैन, हास्य व्यंग के चित्रकार या कलाकार इत्यादि कार्य बुध ग्रह से संबंधित होते है। बुध ग्रह के जातकों के लिए पर्यटन, टेलीफोन, तम्बाकू, पान मसाला, कत्था, किमाम, पुस्तक के थोक विक्रेता, दूर संचार विभाग की ठेकेदारी, रेलवे के पूर्जों का कारखाना, चूड़ियों का व्यापार, कपड़े का व्यापार, हरी वस्तुओं का व्यापार, मार्केटिंग का बिजनेस तथा फर्नीचर आदि का व्यवसाय आपके लिए लाभप्रद रहेगा। इसके लिए बुध ग्रह का शुभ व ताकतवर होना बहुत जरूरी है तभी आप सफल हो पायेंगे। बुध ग्रह को मजबूत करने के आसान उपाय 1) यदि जातक को अपना बुध ग्रह मजबूत करना है तो उसे बुधवार के दिन ज्यादा से ज्यादा हरे रंग का प्रयोग करना चाहिए। 2) गाय को हरा चारा खिलाने से भी बुध ग्रह मजबूत होता है और जीवन में शुभ परिणाम मिलने लगते हैं। 3) मां, बुआ, बहन से रिश्ते मधुर करने से उनका सम्मान करने से और उन्हें हरे वस्त्र, चुड़ी दान करने से भी बुध ग्रह मजबूत होता है। 4) बुधवार के दिन किसी किन्नर को पैसे और वस्त्र दान करें। इससे भी आपका बुध ग्रह मजबूत होगा। 5) बुध ग्रह से पीड़ित लोगों को पन्ना धारण करना चाहिए, पन्ना को सोने या चांदी की अंगूठी में जड़वाकर कनिष्ठा में धारण करना चाहिए। इससे आपकी व्यापार संबंधित समस्याएं दूर होती हैं। लेकिन पन्ना को अपनी राशि के अनुसार किसी की सलाह से धारण करें। बृहस्पति ग्रह से संबंधित व्यापार बृहस्पति को समस्त ग्रहों में शुभ ग्रह माना गया है। इसी के साथ इन्हें ज्ञान, विवेक और धन का कारक माना जाता है। ब्राह्मण का कार्य, धर्मोपदेश का कार्य, धर्मार्थ संस्थान, धार्मिक व्यवसाय, कर्मकाण्ड, ज्योतिष (jyotish), राजनीति, न्यायालय संबंधित कार्य, नयायाधीश, कानून, वकील, बैंकिंग कार्य, कोषाध्यक्ष, राजनीति, अर्थशास्त्र, पुराण, मांगलिक कार्य, अध्यापन कार्य, शिक्षक, शिक्षण संस्थाएं, पुस्तकालय, प्रकाशन, प्रबंधन, पुरोहित, शिक्षण संस्थाएं, किताबों से संबंधित कार्य, परामर्श कार्य, पीले पदार्थ, स्वर्ण, संपादन, छपाई, कागज से संबंधित कार्य, ब्याज कार्य, गृह निर्माण, उत्तम फर्नीचर, शयन उपकरण, खाने पीने की वस्तुएं, स्वर्ण कार्य, वस्त्रों से संबंधित, लकड़ी से संबंधित कार्य, सभी प्रकार के फल, मिठाइयाँ, मोम, घी, किराना इत्यादि से जुड़े कार्य बृहस्पति ग्रह से संबंधित माने गए है। यदि आप संपादन कार्य, थोक विक्रेता, पूजन भण्डार, पान की दुकान, मिठाई की दुकान, इत्र का कार्य, फिल्म मेकर, भूमि का क्रय व विक्रय, आभूषण के विक्रेता, पीली वस्तुओं का व्यापार, वक्ता, नेता, शिक्षा और शेयर आदि का व्यवसाय करना चाहते है तो गुरु ग्रह का कुण्डली में मजबूत होना जरूरी है। जब कुण्डली में बृहस्पति द्वितीयेश व एकादश भावों का स्वामी होकर लग्न , लग्नेश पर प्रभाव डालता हुआ दशम भाव से संबंध बनाता हो तो व्यक्ति बैंक अधिकारी , चल सम्पत्ति का से जुडा़ काम करके पैसा कमा सकता है अथवा किराया , सूद ब्याज द्वारा जीविकोपार्जन कर सकता है ।

बृहस्पति ग्रह को मजबूत करने के आसान उपाय (remedy) 1) गुरु ग्रह को मजबूत करने के लिए जातक को भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए, रोज सुबह शिवजी को सफेद या पीले फूल चढ़ाएं। इसके बाद ‘ऊं आशुतोषाय नम:’ मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही साथ अपने कार्यस्थल का रंग हल्का पीला या सफेद रखने से भी जातक को लाभ मिलता है। 2) गुरु ग्रह को मजबूत करने और गुरु के शुभ परिणाम प्राप्त करने के लिए जातक को भगवान कृष्ण की उपासना करना चाहिए। रोज सुबह-शाम क्लीं कृष्ण क्लीं मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। 3) रोजाना अपने माथे पर सफेद या पीले रंग का चंदन लगाएं, साथ ही रोज अपने पास पीले रंग का एक रेशमी रुमाल रखें। 4) गुरु ग्रह के दोष कम करने के लिए गुरुवार का व्रत रखें, जिसमें पीले वस्त्र पहनें व बिना नमक का भोजन करें। भोजन में पीले रंग की चीजें जैसे बेसन के लड्डू आदि का सेवन करें। शुक्र ग्रह से संबंधित व्यापार शुक्र ग्रह को सुंदरता, ऐश्वर्य तथा कला के साथ जुड़े क्षेत्रों का अधिपति माना जाता है। शुक्र की प्रबल स्थिति जातक को शारीरिक रूप से सुंदर और आकर्षक बनाती है। शुक्र के प्रबल प्रभाव से महिलाएं अति आकर्षक होती हैं। शुक्र के जातक आम तौर पर फैशन जगत, सिनेमा जगत तथा ऐसे ही अन्य क्षेत्रों में सफल होते हैं। कलात्मक कार्य, संगीत (गायन, वादन, नृत्य), अभिनय, चलचित्र संबंधी डेकोरेशन, ड्रेस डिजाइनिंग, मनोरंजन के साधन, फिल्म उद्योग, वीडियो पार्लर, मैरिज ब्यूरो, इंटीरियर डेकोरेशन, फैशन डिजाइनिंग, पेंटिंग, श्रृंगार के साधन, कॉस्मेटिक, इत्र, गिफ्ट हॉउस, चित्रकला तथा स्त्रियों के काम में आने वाले पदार्थ, विवाह से संबंधित कार्य, महिलाओं से संबंधित कार्य, विलासितापूर्ण वस्तु, गाड़ी, वाहन व्यापारी, ट्रांसपोर्ट, सजावटी वस्तुएं, मिठाई संबंधी, रेस्टोरेंट, होटल, खाद्य पदार्थ, श्वेत पदार्थ, दूध से बने पदार्थ, दूध उत्पादन (दुग्धशाला), दही, चावल, धान, गुड़, खाद्य पदार्थ, सोना, चांदी, हीरा, जौहरी, वस्त्र निर्माता , गारमेंट्स, पशु चिकित्सा, हाथी घोड़ा पालन, टूरिज्म, चाय-कॉफी, शुक्र+मंगल= रत्न व्यापारी , शुक्र+राहु या शनि = ब्यूटी पार्लर, शुक्र+चन्द्र = सोडावाटर फैक्ट्री, तेल, शरबत, फल, तरल रंग, अगर आप रेस्टोरेन्ट, सौन्दर्य प्रसाधन, शिल्प कार्य, साहित्य, फिल्म विज्ञापन, परिवहन विभाग की ठेकेदारी, वस्त्रों का व्यापार, हीरे का बिजनेस, सफेद वस्तुओं का कार्य, खनिज कार्य, पेंटिंग, निर्माण कार्य, परिवहन विभाग, पर्यटन विभाग, रेसलिंग, टीवी शो, थियेटर, आदि से सम्बन्धित व्यवसाय करने के लिए शुक्र ग्रह का शुभ व बलवान आवश्यक होता है। शुक्र ग्रह को मजबूत करने के आसान उपाय (remedies) 1) व्यवसाय में सफलता पाने के लिए अपने दुकान या आॅफिस में देवी लक्ष्मी की मूर्ती या तस्वीर स्थापित करें। रोज सुबह उन्हें गुलाब का इत्र अर्पित करें। इसके बाद ‘ऊं श्रीं श्रिंयै नम:’ मंत्र का जाप 108 बार करें। हर शुक्रवार की शाम को देवी को सफेद फूल अर्पित करने से वे प्रसन्न होंगी। 2) व्यवसाय में बेहतरी के लिए रोज सुबह-शाम ‘ऊं शुं शुक्राय नम:’ मंत्र का जाप करें। सफेद स्फटिक की माला गले में धारण करने से भी शुक्र ग्रह मजबूत होता है। 3) शुक्र ग्रह से पीड़ित जातक को काले रंग के प्रयोग से बचना चाहिए। हर शुक्रवार को मां लक्ष्मी को सफेद मिठाई का भोग लगाना चाहिए। शनि ग्रह से संबंधित व्यापार शनि का भूमि क्षेत्र से विशेष संबंध है। शनि पृथ्वी के भीतर पाये जाने वाले पदार्थ का कारक है। लोहा संबंधित कार्य, मशीनरी के कार्य, केमिकल प्रोडक्ट, ज्वलनशील तेल (पेट्रोल, डीजल आदि), कुकिंग गैस , प्राचीन वस्तुएं, पुरातत्व विभाग, अनुसंधान कार्य, ज्योतिष कार्य, लोहे से संबंधित कच्ची धातु, कोयला, चमड़े का काम, जूते, अधिक श्रम वाला कार्य, नौकरी, मजदूरी, ठेकेदारी, दस्तकारी, मरम्मत के कार्य, लकड़ी का कार्य, मोटा अनाज, प्लास्टिक एवं रबर उद्योग , काले पदार्थ, स्पेयर पार्ट्स, भवन निर्माण सामग्री, पत्थर एवं चिप्स, ईंट, शीशा, टाइल्स, राजमिस्त्री, बढ़ई, श्रम एवं समाज कल्याण विभाग, टायर उद्योग, पलम्बर, घड़ियों का काम, कबाड़ी का काम, जल्लाद, तेल निकालना, पीडब्ल्यूडी , सड़क निर्माण, सीमेंट। शनि+गुरु+मंगल= इलेक्ट्रिक इंजिनियर। शनि+बुध+गुरु= मेकेनिकल इंजीनियर। शनि+शुक्र= पत्थर की मूर्ति। लोहा, पेट्रोल या कोयले का बिजनेस मुख्य रूप से शनि ग्रह से जुड़े व्यवसाय है। शनि ग्रह को मजबूत करने के उपाय (remedies) 1) शनि ग्रह को मजबूत करने के लिए जातक को दाहिने हाथ की मध्य अंगुली में लोहे का छल्ला जरूर पहनना चाहिए। इसके अलावा दाहिनी कलाई में काला रेशमी धागा बांधें। 2) शनि ग्रह से पीड़ित जातक को रोज सुबह या शाम को ‘ऊं शं शनैश्चराय नम:’ मंत्र का 108 बार जाप करना चाहिए। जातक हर शनिवार को तिलयुक्त भोजन का दान करें। 3) शनिवार के दिन लोहा, उड़द, सरसों का तेल, तिल, काले वस्त्र आदि चीजों का दान करना चाहिए। इसी के साथ शनिदेव की कृपा पाने के लिए सदैव परिश्रम, ईमानदारी, विनम्रता भाव को अपनाना चाहिए। हमेशा सत्कर्म करने चाहिए। बड़े-बुजुर्गों, निसहाय, निर्धन सभी का सम्मान करना चाहिए। 4) शनिवार के दिन नीलम रत्न धारण करना चाहिए। नीलम रत्न को बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। ज्योतिष (jyotish) के अनुसार इस रत्न को धारण करने से शनि की प्रतिकूलता के प्रभाव समाप्त होते हैं और आपकी कार्यक्षेत्र से संबंधित समस्याएं भी दूर होती हैं। नीलम रत्न को बहुत शक्तिशाली रत्न माना जाता है, इसलिए इसे धारण करने से पहले किसी योग्य ज्योतिष (jyotish) से सलाह अवश्य ले लेनी चाहिए।

राहु से संबंधित व्यवसाय राहु कुंडली (rahu kundali) में विशेषकर विच्छेदात्मक कार्यों का कारक रहा है। ऐसे में जातक ब्रोकर, कमीशन, एजेंट आदि से संबंधित कार्य कर सकता है। कम्प्युटर, बिजली, अनुसंधान, आकस्मिक लाभ वाले कार्य, मशीनों से संबंधित, तामसिक पदार्थ, जासूसी गुप्त कार्य, विषय संबंधी, कीटनाशक, एण्टी बायोटिक दवाईयां, पहलवानी, जुआ, सट्टा, मुर्दाघर, सपेरा, पशु वधशाला, जहरीली दावा, चमड़ा व खाल आदि से संबंधित कार्य करता है।

राहु ग्रह (rahu) को मजबूत करने के आसान उपाय (remedies) - 1) राहु ग्रह के अशुभ परिणामों से बचने के लिए राहु मंत्र का जाप करना चाहिए। 2) राहु की अशुभ दशा से बचने के लिये बुधवार के दिन जौ, सरसों, सिक्का, सात प्रकार के अनाज, नीले या भूरें रंग के कपड़े और कांच की वस्तुओं का दान करें। 3) गोमेद रत्न धारण करने से राहु दोष से मुक्ति मिलती है। 4) राहु की वजह से होने वाली बीमारियों और बाधाओं से बचने के लिए राहु यंत्र की पूजा करें। केतु (ketu) से संबंधित व्यापार केतु को यदि कुंडली (kundali) में एकल अवस्था में गिना जाए तो केतु धर्म का कारक होता है ऐसी स्थिति में जातक धर्म से संबंधित कार्य भक्ति चिकित्सा आदि कार्य करता है। समाज सेवा से जुड़े कार्य, धर्म, आध्यात्मिक कार्य, रहस्यमयी विज्ञान आदि से संबंधित कार्यों से जुड़ा रहता है। अगर आप व्यवसाय में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो मेहनत के साथ-साथ आपको अपने ग्रहों को मजबूत करने के लिए भी कुछ प्रयत्न करना चाहिए। कुंडली (kundali) में गलत स्थान पर बैठा केतु ग्रह (ketu planet) किसी की भी जिंदगी में उथल-पुथल मचा देता है। ऐसे में इसके दुष्प्रभावों से बचने के लिए भगवान गणेश की पूजा-अराधना सबसे आसान उपाय है। मान्यता है कि गणेश जी को केतु का कारक देवता माना गया है। केतु के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए बुधवार के दिन गणेश पूजन करने तथा अथर्वास्तोत्र का पाठ पढ़ने से लाभ होगा।

केतु ग्रह (ketu) को मजबूत करने के आसान उपाय (remedies) 1) काले रंग की गाय का दान करने से केतु ग्रह के संकट को दूर किया जा सकता है, लेकिन अगर काली गाय का दान संभव नहीं है तो काली गाय को चारा खिलाना और उसकी सेवा करने से भी केतु को प्रभावों को कम किया जा सकता है। 2) केतु ग्रह के दुष्प्रभावों से मुक्ति पाने के लिए गरीब, असहाय, अपंग व्यक्तियों को भोजन, धन आदि का दान करें। भूलकर भी उनका अपमान न करें और सामर्थ्य अनुसार मदद करने से केतु का दुष्प्रभाव समाप्त होता है। 3) ज्योतिष (jyotish) के अनुसार काले-सफेद कुत्ते को नियमित तौर पर भोजन का कुछ हिस्सा खाने को दें, वहीं, अगर यह संभव न हो तो काल और सफेद तिल बहते हुए जल में प्रवाहित करने से भी लाभ होता है। 4) कुंडली (kundali) में मौजूद केतु की अशुभता को दूर करने के लिए केतु बीज मंत्र का जाप करें। केतु का एकाक्षरी बीज मंत्र... 'ॐ कें केतवे नम:॥'