श्रवण की कर्तव्यपरायणता


श्रवण कुमार एक निर्धन किशोर था, जो अपने माता-पिता को भारत के सभी धार्मिक स्थलों की यात्रा कराना चाहता था। चूंकि माता-पिता बूढ़े और अंधे थे, वह उन दोनों को दो टोकरियों में बिठाकर अपने कंधे पर रखकर ले जा रहा था। अयोध्या के जंगलों को पार करते समय श्रवण कुमार के माता-पिता को प्यास लगी। उनकी प्यास बुझाने हेतु वह अकेला ही जल की खोज में निकला। तभी जंगल में शिकार के लिए निकले राजा दशरथ का तीर गलती से श्रवण को लग गया और उसकी मृत्यु हो गई । जब श्रवण के प्राण निकल रहे थे तब उसने दशरथ से याचना की कि वह उसके माता-पिता के लिए पानी ले जाएं क्योंकि उसके माता पिता प्यासे थे।


सीख : श्रवण दया और निष्ठा के अवतार थे उन हमे अपने अंदर करुणा का संचार करने की सीख लेनी चाहिए और जिन माता-पिता ने हमे जन्म दिया है उनकी देखभाल हमेशा करना हमारा कर्तव्य है।

VEDIC ANUSHTHAN / PUJA
  • Maha Mrityunjay Anushthaan

  • Kaal Sarp Dosh Nivaran Anushthaan

  • Mrit Sanjivani: मृत संजीवनी

  • Santaan Gopal Anushthan

कैसे अपने दिन को बेहतर बनाये - सुनिए भूमिका कलम की आवाज़ में 

© 2020. Managed by DigiHakk

  • Facebook Clean