Astrology : सुबह इन पांच मंत्रों के जाप (chanting) से बदलेगी आपकी किस्मत


हर कोई चाहता है कि उसका दिन ऊर्जा से भरपूर हो, दिनभर ताजगी रहे और दिन बेहतर बीते। क्योंकि दिन की शुरुआत अच्छी होती है तो परिणाम भी अच्छे मिलते है, लेकिन यह सिर्फ चाहने से पूरा नहीं होगा। इसके लिए व्यक्ति को आध्यात्म और भक्ति का सहारा लेना पड़ेगा। शास्त्रों में ऐसे कई मंत्र (mantra) बताए गए है जिन्हें पढ़ने से आपका दिन शुभ होगा आपकी समस्याओं का अंत होगा आपका भाग्योदय होगा। आईए जानते हैं उन चमत्कारिक मंत्रों के बारे में...


1) कराग्रे वसति लक्ष्मी: कर मध्ये सरस्वती।

कर मूले तू गोविंदा, प्रभाते कर दर्शनम।।

यह मंत्र इतना आसान और करने में इतना सरल है कि आपको इसके लिए किसी भी नियम का पूरा करने की जरूरत नहीं है। इस मंत्र को आप सुबह उठकर बिस्तर में बैठे-बैठे भी कर सकते है। सुबह सबसे पहले दोनों हथेलियों को जोड़कर देखें फिर इस मंत्र का जप करें।


अर्थ : हथेली के सबसे आगे वाले भाग में देवी लक्ष्मी, मध्य भाग में मां सरस्वती का निवास है तथा मूल भाग में परमबह्मा गोविंद का निवास होता है। सुबह उठकर हथेलियों के दर्शन करने से इन सभी के दर्शन होते हैं।


2) जीवन में मिलेगा यश होगी उन्नति

सर्वमंगल मांगल्यै शिव सर्वाथ साधिक।

शरण्ये त्रयम्बके गौरि नरायणि नमोऽस्तु ते ॥


अर्थ : हे मां भगवती नारायणी! तुम सब प्रकार का मंगल प्रदान करने वाली मंगलमयी हो। कल्याण दायिनी शिवा हो। सब पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली, शरणागत वत्सला, तीन नेत्रों वाली एवं गौरी हो। तुम्हें नमस्कार है, तुम्हे नमस्कार है, तुम्हें नमस्कार है।


3) स्वास्थ्य होगा बेहतर, शरीर रहेगा निरोगी

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वित:।

मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय।।


अर्थ : हे देवी मां मुझे सौभाग्य और आरोग्य दो। परम सुख दो, रूप दो, जय दो, यश दो और काम क्रोध आदि शत्रुओं का नाश करो।


4) मां बगलामुखी को करें प्रसन्न, होगा शत्रुओं का नाश

ॐ ह्रीं लृी बगलामुखी मम् सर्वदुष्टानाम वाचं मुखं पदं ।

स्तंभय जिव्हां कीलय बुद्धिम विनाशय ह्रीं लृी ॐ स्वाहा ।।


जीवन में लगातार बढ़ते शत्रुओं की संख्या से उनसे बोती परेशानी को खत्म करने के लिए इस मंत्र (mantra) को कम से कम 10 हजार बार जप करें। वहीं अगर जीवन-मरण का प्रश्न है तो कम से कम एक लाख बार इस मंत्र का जप करें। ऐसे व्यक्ति को हमेशा सफलता प्राप्त होती है। हर स्थिति में उसकी विजय होती है।


5) न चुकने वाले ऋण से भी मिलेगी मुक्ति

ओम गं ऋणहतार्यै नम:

अथवा

ओम छिन्दी छिन्दी वरैण्यम् स्वाहा


अर्थ : कर्ज से मुक्ति दिलाने वाले भगवान गणेश को मेरा नमस्कार। यह ऋणहर्ता है, इसके हर रोज जप से भगवान गणेश प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति का कर्ज धीरे-धीरे चुकता हो जाता है। साथ ही बाद में आपको कर्ज की नौबत ही नहीं आएगी।


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