Astrology मंत्र (mantra) जाप में बरतें सावधानियां, न करें गलती वरना मिलेगा अशुभ फल

Astrology : हिंदू धर्म व ज्योतिष शास्त्र (jyotish shastra) में असंख्य मंत्र (mantra) हैं, जिनका अलग-अलग महत्व है। इन मंत्रों के जाप से जातक अपनी परेशानियों से मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं, कार्यसिद्धि कर सकते हैं व मन की शांति प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन हर मंत्र के जाप करने की एक विशिष्ट विधि होती है कई बार जाने-अनजाने में या हमें उस विधि का सही ज्ञान नहीं होने के कारण हम ऐसी छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं जिससे हमें मंत्र जाप का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है और हमारी परेशानियां कम होने की बजाए बढ़ जाती हैं। आईए आज हम जानेंगे ऐसी कौन सी गलतियां हैं जो हमें मंत्र (mantra) जाप के दौरान नहीं करना चाहिए, कौन-कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए... - मंत्र (mantra) जाप में हमेशा रुद्राक्ष, स्फटिक, हल्दी, चंदन और तुलसी की माला का ही प्रयोग करना चाहिए, भूल से भी प्लास्टिक की माला का प्रयोग न करें। प्लास्टिक की माला के इस्तेमाल से आपको कभी भी मंत्र जाप का पूरा लाभ नहीं मिलेगा। - मंत्र जाप हमेशा घर के मंदिर में ईश्वर के सम्मुख करना चाहिए, यदि मंदिर में संभव न हो तो फिर घर के किसी शांत स्थान पर बैठकर मंत्र जाप करना चाहिए। आप जिस स्थान पर मंत्र करना चाहते हैं वहां की जमीन को साफ कर वहां शुद्ध ऊनी आसन बिछाएं। - मंत्र जाप के दौरान आपको बैठने की मुद्रा पर भी विशेष ध्यान देना होगा। कमर एक दम सीधी रखें और चेहरे को भी सीध में रखें। आप पद्मासन या सुखासन में बैठे सकते हैं। - मंत्र जाप में इस्तेमाल की जाने वाली माला को जाप से पहले गंगाजल से शुद्ध कर लें और धूप-दीप लगाकर अपने माथे पर तिलक लगाएं। -जब तक आप मंत्रों का जापकर रहें हैं तब तक इस बात का विशेष ध्यान रखें की आपके पास दीपक जलते रहना चाहिए। - मंत्र जाप करने से पहले मंत्रों की संख्या का संकल्प ले और आराध्य देव का स्मरण कर ही मंत्रों का जाप शुरू करना चाहिए। - जाप (chant) करते समय पूर्व दिशा की तरफ अपना मुख रखें। माला से जाप हमेशा दायें हाथ से करें। मंत्र जाप करते समय अपना ध्यान इधर-उधर न लगाएं। - मंत्रों का जाप करते समय माला को अनामिका उंगली और अंगूठे के इस्तेमाल से घुमाना चाहिए, ध्यान रखें कि अन्य उंगलियों का माला से स्पर्श नहीं होना चाहिए। - माला को इस तरह से पकड़े जिससे न तो वो नाभि से नीचे हो और न ही नाक से ऊपर जाए। ध्यान रखें कि माला पर आपके हाथ के नाखून स्पर्श न करें। जाप करते समय माला को सीने से दूर रखें। - माला के सुमेरु को कभी भी क्रॉस न करें। सुमेरु माला का वह भाग है जहां से मंत्र जाप शुरू और खत्म करते हैं। माला फेरते समय इस बात का ध्यान रखें कि जहाँ माला समाप्त हो फिर से वापस वहीं से मंत्र जाप शुरू करें। - जाप खत्म होने के बाद माला को उसके स्थान पर रख दें। सामान्यत: जाप किए जाने वाले मंत्र: ॐ नम: शिवाय। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उवार्रुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।। ॐ भूर्भुव: स्व: तत् सवितुर्वरेण्यं। भगोर्देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।,

© 2023. Managed by DigiHakk

  • YouTube
  • Facebook Clean
  • Instagram
Logo-Final-white-trans_edited.png