तांत्रिक (Tantric) कैसे करते हैं नकारात्मक ऊर्जा का आव्हान, जानें 10 खतरनाक तांत्रिक साधनाएं




हिंदू धर्म और अन्य धर्मों में अलग-अलग साधना और ध्यान की विधियां प्रचलित है। हर धर्म में साधना के अलग-अलग मार्ग स्थापित किए गए है। हिंदू धर्म में सामान्यत: दो मार्ग प्रचलित है पहला दक्षिणमार्गी और दूसरा वाममार्गी। दक्षिणमार्गी में साधक सात्विक रूप से ईश्वर का आव्हान करता है, वहीं वाममार्गी साधना में तंत्र (tantra), काला जादू (Black magic), टोना-टोटका आदि तांत्रिक साधनाएं शामिल होती है। जिन्हें हिंदू धर्म में कर्ई जगह निषेध माना गया है। वाममर्गी साधना से तांत्रिक परालौकिक शक्तियों और नकारात्मक शक्तियों का आव्हान कर उनसे अपने लाभ और दूसरों को हानि पहुंचाने व अपने गलत काम सिद्ध करवाते है। हालांकि तांत्रिक साधनाओं के अलावा ऐसी भी साधनाएं हैं जिनको धर्म में निषेध माना गया है। शैव, शाक्त और नाथ संप्रदाय में सभी तरह की साधनाओं का प्रचलन है। तंत्र विज्ञान में मिलता है इन साधनाओं का उल्लेख तंत्र साधना में शांति कर्म, वशीकरण, स्तंभन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण नामक छ: तांत्रिक षट् कर्म होते हैं। इसके अलावा नौ प्रयोगों का वर्णन मिलता है:- मारण, मोहनं, स्तंभनं, विद्वेषण, उच्चाटन, वशीकरण, आकर्षण, यक्षिणी साधना, रसायन क्रिया तंत्र के ये नौ प्रयोग हैं। उक्त सभी को करने के लिए अन्य कई तरह के देवी-देवताओं की साधना की जाती है। अघोरी (Aghori) लोग इसके लिए शिव साधना, शव साधना और श्मशान साधना करते हैं। बहुत से लोग भैरव साधना, नाग साधना, पैशाचिनी साधना, यक्षिणी साधा या रुद्र साधना करते हैं। एस्ट्रोभूमि (Astrobhoomi) प्लेटफॉर्म से जुड़े लोगों के लिए और तंत्र, काले जादू और टोना-टोटका से परेशान लोगों के लिए हमने 10 तरह की साधनाओं के बारे में जानकारी एकत्रित की है जिन्हें करने से व्यक्ति का जीवन या तो सफल होगा या बर्बाद हो सकता है। इन्हें करने में बहुत सावधानी और हिम्मत की जरूरत होती है। आइए जानते हैं 10 तरह की खतरनाक साधनाओं के बारे में... नवदुर्गा साधना : वैसे तो सामन्यत: साल में चार नवरात्रि (navratri) आती हैं दो प्रत्यक्ष और दो गुप्त नवरात्रि। जिनमें सामान्य साधक तो मां दुर्गा की सात्विक पूजा करते हैं लेकिन तांत्रिकों के लिए गुप्त नवरात्रि का महत्व काफी बढ़ा होता है और वह इन नौ दिनों में मां के अन्य रूपों की साधना कर परालौकिक शक्तियों को जाग्रत कर अपनी मर्जी के अनुसार कर्म करते हैं। आमजन माता दुर्गा की यह सात्विक साधना होती है जिसे नवरात्रि में किया जाता है। ये नौ दुर्गा है- 1.शैलपुत्री, 2.ब्रह्मचारिणी, 3.चंद्रघंटा, 4.कुष्मांडा, 5.स्कंदमाता, 6.कात्यायनी, 7.कालरात्रि, 8.महागौरी और 9.सिद्धिदात्री। लेकिन हम यहां आपको बताना चाहते हैं 10 महाविद्या के बारे में। दिव्योर्वताम स: मनस्विता: संकलनाम । त्रयी शक्ति ते त्रिपुरे घोरा छिन्न्मस्तिके च।। 10 महाविद्या की साधनाएं : माता दुर्गा की एक सात्विक साधना होती है जिसे नवरात्रि (navratri) में किया जाता है। नवरात्रि समाप्त होने के बाद गुप्त नवरात्रि शुरू होती है तब 10 महाविद्याओं की साधना की जाती है। आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली नवरात्र को गुप्त नवरात्र कहा जाता है। गुप्त नवरात्रि विशेषकर तांत्रिक क्रियाएं, शक्ति साधना, महाकाल आदि से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्त्व रखती है। गुप्त नवरात्रि की प्रमुख देवियां : गुप्त नवरात्र के दौरान कई साधक महाविद्या (तंत्र साधना) के लिए दस महा विद्या:- 1.काली, 2.तारा, 3.त्रिपुरसुंदरी, 4.भुवनेश्वरी, 5.छिन्नमस्ता, 6.त्रिपुरभैरवी, 7.धूमावती, 8.बगलामुखी, 9.मातंगी और 10.कमला देवी की पूजा करते हैं। सभी की पूजा के अलग अलग लाभ और महत्व है। इनमें से किसी भी एक की साधना करने से वह देवी प्रसन्न होकर साधक को अपनी शक्ति देती है और सभी मनोकामना पूर्ण करती है। शास्त्रों (shastro) अनुसार इन दस महाविद्या में से किसी एक की नित्य पूजा अर्चना करने से लंबे समय से चली आ रही ?बीमार, भूत-प्रेत, अकारण ही मानहानी, बुरी घटनाएं, गृहकलह, शनि का बुरा प्रभाव, बेरोजगारी, तनाव आदि सभी तरह के संकट तत्काल ही समाप्त हो जाते हैं और व्यक्ति परम सुख और शांति पाता है। इन माताओं की साधना कल्प वृक्ष के समान शीघ्र फलदायक और सभी कामनाओं को पूर्ण करने में सहायक मानी गई है। पिशाचिनी या पैशाचिनी साधनाएं : पिशाची देवी ही पिशाचिनी साधनाओं की अधिष्ठात्री देवी है। यह हमारे हृदय चक्र की देवी है। इसे बहुत ही खतरनाक तरह की साधनाएं माना जाता है। किसी भी एक पिशाचिनी की साधना करने के बाद व्यक्ति को चमत्कारिक सिद्धि प्राप्त हो जाती है। पिशाचिनी साधना में कर्ण पिशाचिनी, काम पिशाचिनी आदि का नाम प्रमुख है। पिशाच शब्द से यह ज्ञात होता है कि यह किसी खतरनाक भूत या प्रेत का नाम है लेकिन ऐसा नहीं है। यह साधनाएं भी तंत्र के अंतर्गत आती है। कर्ण पिशाचिनी साधना को सिद्ध करने के बाद साधक में वो शक्ति आ जाती है कि वह सामने बैठे व्यक्ति की नितांत व्यक्तिगत जानकारी भी जान लेता है। कर्ण पिशाचिनी साधक को किसी भी व्यक्ति की किसी भी तरह की जानकारी कान में बता देती है। इस साधना की सिद्धि के पश्चात् किसी भी प्रश्न का उत्तर कोई पिशाचिनी कान में आकर देती है अर्थात् मंत्र की सिद्धि से पिशाच-वशीकरण होता है। मंत्र की सिद्धि से वश में आई कोई आत्मा कान में सही जवाब बता देती है। पारलौकिक शक्तियों को वश में करने की यह विद्या अत्यंत गोपनीय और प्रामाणिक है। भैरव साधना : भगवान भैरव की साधनाएं भी कई तरह की होती है। उनमें सबसे प्रमुख है काल भैरव और बटुक भैरव साधनाएं। इसके अलावा उग्र भैरव, असितंग भैरव, क्रोध भैरव, स्वर्णाकर्षण भैरव, भैरव-भैरवी आदि साधनाएं भी होती है। भैरव को शिव का रुद्र अवतार माना गया है। तंत्र साधना में भैरव के आठ रूप भी अधिक लोकप्रिय हैं- 1.असितांग भैरव, 2. रु-रु भैरव, 3. चण्ड भैरव, 4. क्रोधोन्मत्त भैरव, 5. भयंकर भैरव, 6. कपाली भैरव, 7. भीषण भैरव तथा 8. संहार भैरव। आदि शंकराचार्य ने भी 'प्रपञ्च-सार तंत्र' में अष्ट-भैरवों के नाम लिखे हैं। तंत्र शास्त्र में भी इनका उल्लेख मिलता है। इसके अलावा सप्तविंशति रहस्य में 7 भैरवों के नाम हैं। इसी ग्रंथ में दस वीर-भैरवों का उल्लेख भी मिलता है। इसी में तीन बटुक-भैरवों का उल्लेख है। रुद्रायमल तंत्र में 64 भैरवों के नामों का उल्लेख है। योगिनी साधनाएं : समस्त योगिनियों का संबंध आदि शक्ति काली के कुल से है। घोर नामक दैत्य से साथ युद्ध के समय आदि शक्ति काली ने ही समस्त योगिनियों के रूप में अवतार लिया था। महा विद्याएं, सिद्ध विद्याएं भी योगनियों की ही श्रेणी में आती हैं ये भी आद्या शक्ति काली के ही भिन्न भिन्न अवतारी अंश हैं। समस्त योगिनियां, अपने अंदर नाना प्रकार के अलौकिक शक्तिओं से सम्पन्न हैं तथा इंद्रजाल, जादू, वशीकरण, मारण, स्तंभन इत्यादि कर्म इन्हीं की कृपा द्वारा ही सफल हो पाते हैं। मुख्य रूप से योगिनियां अष्ट योगिनी तथा चौसठ योगिनी के नाम से जानी जाती हैं, जो अपने गुणों तथा स्वभाव से भिन्न-भिन्न रूप धारण करती हैं। अष्ट योगिनियां- 1. सुर-सुंदरी योगिनी, 2. मनोहरा योगिनी 3. कनकवती योगिनी 4. कामेश्वरी योगिनी, 5. रति सुंदरी योगिनी 6. पद्मिनी योगिनी 7. नतिनी योगिनी और 8. मधुमती योगिनी हैं। चौसठ योगिनी- १.बहुरूप, २.तारा, ३.नर्मदा, ४.यमुना, ५.शांति, ६.वारुणी, ७.क्षेमंकरी, ८.ऐन्द्री, ९.वाराही १०.रणवीरा, ११.वानर-मुखी, १२.वैष्णवी, १३.कालरात्रि, १४.वैद्यरूपा, १५.चर्चिका, १६.बेतली १७.छिन्नमस्तिका, १८.वृषवाहन, १९.ज्वाला कामिनी, २०.घटवार, २१.कराकाली, २२.सरस्वती, २३. बिरूपा, २४.कौवेरी, २५.भलुका, २६.नारसिंही, २७.बिरजा, २८.विकतांना, २९.महालक्ष्मी, ३०.कौमारी, ३१.महामाया, ३२.रति, ३३.करकरी, ३४.सर्पश्या, ३५.यक्षिणी, ३६.विनायकी, ३७.विंद्यावालिनी, ३८.वीर कुमारी, ३९.माहेश्वरी, ४०.अम्बिका, ४१.कामिनी, ४२. घटाबरी, ४३. स्तुती, ४४. काली, ४५. उमा, ४६.नारायणी, ४७.समुद्र, ४८.ब्रह्मिनी, ४९.ज्वालामुखी, ५०.आग्नेयी, ५१.अदिति, ५२.चन्द्रकान्ति, ५३. वायुवेगा, ५४.चामुण्डा, ५५.मूरति, ५६.गंगा, ५७.धूमावती, ५८.गांधार, ५९.सर्व मंगला, ६०.अजिता, ६१.सूर्य पुत्री, ६२.वायु वीणा, ६३.अघोर और ६४.भद्रकाली हैं। यक्ष और यक्षिणी : यक्ष की स्त्रियों को यक्षिणियां कहते हैं। ये भी कई प्रकार के होते हैं जो भूमि में गड़े हुए खजाने आदि के रक्षक हैं, इन्हें निधि पति भी कहा जाता हैं। इनके सर्वोच्च स्थान पर निधि पति 'कुबेर' विराजित हैं तथा देवताओं के निधि के रक्षक हैं। ये देहधारी होते हुए भी सूक्ष्म रूप से युक्त होकर जहां चाहे वहां विचरण कर सकते हैं। इनका प्रमुख कर्म धन से संबंधित हैं, ये गुप्त धन या निधियों की रक्षा करते हैं तथा समृद्धि, वैभव, राज पाट के स्वामी हैं। आदि काल से ही, मनुष्य धन से सम्पन्न होने हेतु, अपने धन की रक्षा हेतु, यक्षों की अराधना करते आए हैं। भिन्न-भिन्न यक्षों की प्राचीन पाषाण प्रतिमा भारत के विभिन्न संग्रहालयों में आज भी सुरक्षित हैं, जो खुदाई से प्राप्त हुए हैं। तंत्रो (tantro) के अनुसार, रतिप्रिया यक्षिणी, साधक से संतुष्ट होने पर 25 स्वर्ण मुद्राएं प्रदान करती हैं। इसी तरह सुसुन्दरी यक्षिणी, धन तथा संपत्ति सहित, पूणार्यु, अनुरागिनी यक्षिणी, 1000 स्वर्ण मुद्राएं, जलवासिनी यक्षिणी, भिन्न प्रकार के नाना रत्नों को, वटवासिनी यक्षिणी, नाना प्रकार के आभूषण तथा वस्त्र को प्रदान करती हैं। तंत्र ग्रंथों में यक्षिणी तथा यक्ष के साधना के विस्तृत विवरण मिलते हैं। प्रमुख यक्षिणियां है - 1. सुर सुन्दरी यक्षिणी, 2. मनोहारिणी यक्षिणी, 3. कनकावती यक्षिणी, 4. कामेश्वरी यक्षिणी, 5. रतिप्रिया यक्षिणी, 6. पद्मिनी यक्षिणी, 7. नटी यक्षिणी और 8. अनुरागिणी यक्षिणी। अन्य तांत्रिक साधानों के बारे में अगले भाग (Part-2) में जानकारी दी जाएगी, जुड़े रहिए एस्ट्रोभूमि (Astrobhoomi) प्लेटफॉर्म के साथ