चमत्कारिक शक्तियों वाला दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) का पाठ



शक्ति की साधना के लिए दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) के 13 पाठों का विशेष महत्व है. इस विशेष पाठ में महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा का वर्णन है.


श्री दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) नारायण वतार श्री व्यासजी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कण्डेयपुराण से ली गई है. इसमें सात सौ पद्यों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती कहा गया है. दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है. इसके 700 श्लोकों को तीन भागों में बांटा गया गया है. इसमें महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती की महिमा का वर्णन है. मां जगदंबे की साधना के लिए किए जाने वाले दुर्गा सप्तशती के 13 पाठों का अपना विशेष महत्व है.


इसमें अलग-अलग पाठ अलग-अलग बाधाओं के निवारण के लिए किए जाते हैं। आइए जानते हैं कि दुर्गा सप्तशती के किस पाठ को करने से क्या फल मिलता है.


प्रथम अध्याय - दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) का प्रथम पाठ करने से सभी प्रकार की चिंताएं दूर होती हैं.


द्वितीय अध्याय - दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) का द्वितीय पाठ करने से किसी भी तरह की शत्रुबाधा दूर होती है और कोर्ट-कचहरी आदि से जुड़े मुकदमे में विजय प्राप्त होती है.


तृतीय अध्याय - दुर्गा सप्तशती के तृतीय अध्याय का पाठ करने से शत्रुओं का नाश होता है.


चतुर्थ अध्याय - दुर्गा सप्तशती के चतुर्थ अध्याय का पाठ करने से मां जगदंबे के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है.


पंचम अध्याय - दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) के पांचवें अध्याय का पाठ करने से भक्ति, शक्ति एवं देवी दर्शन का आशीर्वाद मिलता है.


षष्ठ अध्याय - दुर्गा सप्तशती के छठवें अध्याय का पाठ करने से दुख, दारिद्रय, भय आदि दूर होता है.


सप्तम अध्याय - दुर्गा सप्तशती के सातवें अध्याय का पाठ करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं


अष्टम अध्याय - दुर्गा सप्तशती का आठवां अध्याय वशीकरण एवं मित्रता करने के लिए विशेष रूप से किया जाता है.


नवम अध्याय - दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) के नौवें अध्याय का पाठ संतान की प्राप्ति और उन्नति के लिए किया जाता है. किसी खोई चीज को पाने के लिए भी यह पाठ अत्यंत सिद्ध एवं प्रभावशाली है.


दशम अध्याय - दुर्गा सप्तशती के दसवें अध्याय का पाठ करने पर नौवें अध्याय के समान ही फल प्राप्त होता है.


एकादश अध्याय - दुर्गा सप्तशती के दसवें अध्याय का पाठ तमाम तरह की भौतिक सुविधाएं प्राप्त करने के लिए किया जाता है.


द्वादश अध्याय - दुर्गा सप्तशती के बारहवें अध्याय का पाठ मान-सम्मान एवं लाभ दिलाने वाला है.


त्रयोदश अध्याय - दुर्गा सप्तशती (Durga Saptashati) के तेरहवें अध्याय का पाठ विशेष रूप से मोक्ष एवं भक्ति के लिए किया जाता है।