क्षमा करना शक्तिशाली होने की पहचान है: भूमिका कलम


क्रोध, गुस्सा, ईर्ष्या और बदला लेने की भावना यह वह अग्नि है जो सबसे पहले हमें जलाती है, क्योंकि मन में आने वाली यह भावना सबसे पहले हमारे संयम, विवेक और ज्ञान को जलाती है। विवेकहीन व्यक्ति हमेशा ही गलत निर्णय लेता है और गलत फैसलों से सदैव नुकसान ही होता है। इसलिए व्यक्ति को चाहे जो परिस्थिति हो अपना विवेक नहीं खोना चाहिए। यदि ईश्वर ने आपको शक्ति दी या आपने अपने पुरुषार्थ से शक्ति अर्जित की है तो उसे संभालना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि शक्ति के साथ आपको प्रकृति बहुत सी जिम्मेदारी भी देती है। और असल में शक्ति का अर्थ यह नहीं होता कि आप उससे दूसरों का बुरा करें बल्कि शक्ति का अर्थ होता है कि आप दीन, दुखी, असहाय और समाज में पिछड़े वर्ग का उत्थान करें। सामर्थवान व्यक्ति वह नहीं होता जो अपने स्वार्थ और मन की शांति के लिए दूसरों से बदला ले बल्कि असल सामर्थवान व्यक्ति वह होता है जिसमें क्षमा करने का गुण होता है, क्षमा (forgive) करना हर किसी के बस की बात नहीं होती है। क्षमा (forgive) करने के लिए विशाल ह्रदय की आवश्यकता होती है। यदि किसी को दण्ड भी देना हो तो सबसे पहले यह देखना चाहिए कि इसे दण्ड देने से समाज का क्या भला होगा, समाज कल्याण के लिए यदि किसी को दंडित करना पड़े भी तो सभी पहलुओं पर विवकेपूर्ण मंथन करना चाहिए। शक्तिशाली व्यक्ति को वह आदर्श स्थापित करना चाहिए जिसका अनुसरण कर समाज सही दिशा में आगे बढ़ सके। जिस प्रकार भगवान श्री राम ने अपने वनवास के दौरान हमेशा दीन, दुखी, असहाय और वंचित वर्ग को अपने साथ रखा, उनके उत्थान के लिए कार्य किए, लोगों को क्षमा किया और समाज कल्याण के लिए, बुराई पर अच्छाई की विजय के लिए रावण का वध किया, उन्होंने वह मार्ग स्थापित किया जिस पर आगे चलकर समाज को उन्नति की नई दिशा मिली। उन्होंने सदाचार, सत्य और कर्तव्यनिष्ठा को सर्वोपरि रखा। पिता की आज्ञा पाकर 14 वर्ष का वनवास सहर्ष स्वीकार किया। उनके जीवन से हमें यह सभी गुण सिखना चाहिए। जो मार्ग उन्होंने हमें दिखाया उस पर चलने की कोशिश करना चाहिए, क्योंकि उनके इन्हीं गुणों के कारण वे समाज में पूज्यनीय हुए। जब वह वनवास के लिए राज महल से निकले थे तो वह राज राम थे लेकिन जब वनवास से वह वापस लौटे तो मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम बनकर लौटे, उनके इन्हीं गुणों ने उन्हें भगवान बनाया, यदि कोई भी व्यक्ति गुणों को अपने जीवन में उतारता है तो वह भी समाज में सम्मानित होता है और लोगों के लिए आदर्श स्थापित करता है।